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आई आई एन डेस्क

भट्टा स्वामी ने चौकीदार को भट्टे में झोंक दिया, जिससे चौकीदार की कुछ ही क्षणों में मौत हो गई। पुलिस ने भट्टा स्वामी के विरुद्ध नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया है एवं आरोपी गिरफ्तार भी कर लिया गया है।
सनसनीखेज घटना बदायूं जिले में सिविल लाइन थाना के गाँव दौरी नरोत्तमपुर के पास स्थित भट्टे की है। भट्टा ककराला निवासी रामेन्द्र गुप्ता का है, जिस पर दौरी नरोत्तमपुर का ही वीरपाल चौकीदार था। मृतक के बेटे ढाकपाल का आरोप है कि रुपयों को लेन-देन को लेकर भट्टा स्वामी रामेन्द्र गुप्ता और उसके पिता के बीच विवाद था, जिसको लेकर रामेन्द्र गुप्ता ने उसके पिता को जिंदा जला दिया। सीओ सिटी राजेन्द्र सिंह धामा ने मौके पर जाकर जांच भी की।
मृतक के पुत्र की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है एवं पुलिस ने रामेन्द्र गुप्ता को भी गिरफ्तार कर लिया है। घटना को लेकर यह भी चर्चा है कि वीरपाल की मृत्यु हादसे के चलते हुई है, लेकिन सच का खुलासा पुलिस की जांच के बाद ही हो सकेगा

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आई आई इन डेस्क मुंबई –  महाराष्ट्र में अब तक का सबसे बड़ा एजुकेशन घोटाला सामने आया है इस केस में महाराष्ट्र के एक पूर्व मंत्री भी जांच के दायरे में हैं। इस घोटाले में महाराष्ट्र सरकार के दो विभागों के खजाने से प्रति स्टूडेंट के नाम पर 48 हजार रुपये निकाल लिए गए पर इन स्टूडेंट्स को खुद पता नहीं कि वे किस कॉलेज में पढ़ते हैं करीब दस हजार करोड़ रूपये के इस घोटाले में पांच लोगो को गिरफ्तार क्या जा चूका है

गढ़चिरौली के स्पेशल क्राइम ब्रांच यूनिट के इंस्पेक्टर रवींद्र पाटील ने शुक्रवार को एनबीटी को विस्तार से इस घोटाले की जानकारी दी। श्री पाटील के अनुसार, वर्धा में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति है जिसकी स्थापना महात्मा गांधी ने की थी। महाराष्ट्र की एक पावरफुल महिला के एक बेहद करीबी ने इंडिया नॉलेज कॉर्पोरेशन और राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के बीच एक अग्रीमेंट करवाया। इस अग्रीमेंट के बाद एक नई समिति का गठन हुआ जिसका नाम रखा गया- राष्ट्र भाषा प्रचार समिति ज्ञान मंडल।

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ने यूजीसी से पांच टेक्निकल कोर्सज की डिस्टेंश एजुकेशन की परमिशन मांगी। यूजीसी ने पांच साल के लिए यह परमिशन दे भी दी। परमिशन के तहत ये कोर्स राष्ट्रभाषा प्रचार समिति को शुरू करवाने थे पर राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ने यह अधिकार अपनी मर्जी से राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ज्ञान मंडल को दे दिया।

एक भी स्टूडेंट का पता नहीं

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ज्ञान मंडल ने इसके लिए कागज पर पूरे महाराष्ट्र में 262 स्टडी सेंटर दिखाए। यूजीसी परमिशन के तहत एक स्टडी सेंटर अपने सेंटर में एक कोर्स के लिए अधिकतम 60 स्टूडेंट्स रख सकता था। इस तरह हर सेंटर में अधिकतम 300 स्टूडेंट्स होने चाहिए थे पर कई स्टडी सेंटर ने अपने यहां एसटी, एससी, ओबीसी व ऐंटी टीडी आरक्षण के तहत 600-600 स्टूडेंट्स तक रेकॉर्ड में दिखाए। हालांकि हकीकत में एक भी स्टूडेंट नहीं था। यहां तक कि किसी भी स्टडी सेंटर के लिए कॉलेज जैसा कोई परिसर भी नहीं था। अलबत्ता, किसी भी हाउसिंग सोसाइटी में छोटे-छोटे एक या दो घर ले लिए गए थे जहां एक-दो चपरासी और चंद अन्य लोग रखे गए थे।

48 हजार रुपये फीस

हर टेक्निकल कोर्स की फीस प्रति स्टूडेंट प्रति साल 48 हजार रुपये थी पर इस स्टडी सेंटर में आरक्षित श्रेणी के स्टूडेंट की पूरी फीस सरकार को भरनी थी। एसटी श्रेणी के स्टूडेंट की फीस भरने का यह जिम्मा महाराष्ट्र सरकार के विभाग अकादमिक आदिवासी विकास प्रकल्प कार्यालय के पास था जबकि एसटी को छोड़कर शेष एससी, ओबीसी व ऐंटि टीडी आरक्षित श्रेणियों के स्टूडेंट की फीस समाज कल्याण विभाग को देनी होती है।

इस 48 हजार रुपये में 2300 रुपये की रकम सीधे स्टूडेंट के अकाउंट में, 9,000 रुपये राष्ट्रभाषा प्रचार समित ज्ञान मंडल के अकाउंट में जबकि शेष करीब 35 हजार रुपये की रकम स्टडी सेंटर के अकाउंट में ट्रासंफर होनी थी। यह सारी रकम दोनों सरकारी विभागों से ट्रांसफर हुई भी पर हकीकत यह है कि इन किसी भी 262 स्टडी सेंटर में कोई भी स्टूडेंट पिछले पांच साल में कभी पढ़ा ही नहीं।

एजेंट को घुमाया

तो यह रकम सरकार से ली कैसे गई? इंस्पेक्टर रवींद्र पाटील ने एनबीटी को बताया कि राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ज्ञान मंडल के लोगों ने पूरे महाराष्ट्र में अपने एजेंट गांव गांव में भेजे। इन एजेंटों ने आरक्षित श्रेणी के लोगों से किसी सरकारी स्कीम के बहाने जरूरी दस्तोवज लिए और फिर उनकी झेराक्स करवाकर दोनों सरकारी विभागों अकादमिक आदिवासी विकास कार्यालय व समाज कल्याण विभाग को भेज दिए। फिर इन दस्तावेजों के आधार पर इन दोनों सरकारी विभागों से रकम रिलीज की जाती रही।

फर्जी अकाउंट

यदि कायदे से देखा जाए तो इस घोटाले में सिर्फ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ज्ञान मंडल ही आरोपी माना चाहिए पर हकीकत में दोनों सरकारी विभाग भी उतने ही दोषी हैं। इसकी वजह है स्टूडेंट के अकाउंट नंबर जिसमें प्रति स्टूडेंट 2300 रुपये जमा होने थे। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ज्ञान मंडल वालों ने दोनों सरकारी विभागों को स्टूडेंट के जो बैंक अकाउंट नंबर दिए, वे सब अंदाज से दिए नंबर थे जिनके आखिरी अंक 11-11 या 12-12 से खत्म होते थे।

जब इन अकाउंट में चेक भेजे गए तो स्वाभाविक है वे रिटर्न हो गए। रिटर्न होकर ये चेक आए इन दो सरकारी विभागों में ही, जहां से ये जारी किए गए थे। ऐसे में इन सरकारी विभागों के कुछ क्लर्कों ने राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ज्ञान मंडल के लोगों से कुछ फर्जी अकाउंट खुलवाए और फिर उसमें यह रकम ट्रांसफर की गई। इंस्पेक्टर रवींद्र पाटील के अनुसार, यदि पिछले 5 साल से सभी 262 सेंटर का पूरा हिसाब लगाया जाए और इन 262 सेंटरों के 600 स्टूडेंट्स के नाम पर प्रति स्टूडेंट 48 हजार रुपये का पूरा गुणा किया जाए तो यह घोटाला कई कई हजार हजार करोड़ रुपये का बैठता है।

मंत्री पर शक क्यों

अकादमिक आदिवासी विकास कार्यालय व समाज कल्याण विभाग पूर्व में जिस मंत्री के अंडर में आते हैं, जांच चल रही है कि कहीं उनकी तो इस घोटाले में कोई भूमिका तो नहीं थी। उम्मीद की जा रही है कि नई सरकार यह केस स्टेट सीआईडी को ट्रांसफर कर सकती है। पूर्व मंत्री, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ज्ञान मंडल से जुड़े बड़े लोगों और महाराष्ट्र की एक पॉवरफुल महिला व उसके करीबी से पूछताछ उसी के बाद होने की संभावना है।

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आई आई इन डेस्क नई दिल्ली –  एक तरफ़ा प्यार में बौखलाए युवक ने लड़की को बीच सड़क पर गिराकर उसके मुह में एसिड डाल दिया वह बुरी तरह घायल हो गई। फिर युवक ने खुद भी वहीं ऐसिड पी लिया। दोनों अस्पताल में इलाजरत हैं। पुलिस ने मामला भी दर्ज कर लिया है।

यह घटना साउथ ईस्ट दिल्ली की श्रीनिवासपुरी में 2 जनवरी की सुबह हुई और लड़की ने अब बयान दर्ज कराए हैं। 25 साल की पूनम (बदला नाम) श्रीनिवासपुरी में सरकारी कॉलोनी में रहती है। वह लाजपत नगर में कॉल सेंटर में नौकरी करती है। पूनम सुबह 9 बजे घर से ऑफिस जा रही थी। वह पैदल श्रीनिवासपुरी जी ब्लॉक से एच ब्लॉक पहुंची तो अचानक पीछे से एक युवक ने पूनम के सिर पर मुक्के मारकर उसे नीचे सड़क पर गिरा दिया।

पूनम के गिरते ही उस युवक ने ऐसिड से भरी बोतल उसके मुंह में उड़ेल दी। वह बुरी तरह जख्मी हो गई। इसके बाद उस युवक ने खुद भी वही बोतल मुंह से लगा ली। वह भी वहीं गिर गया। राहगीरों ने पुलिस को घटना की खबर दी। फिर पुलिस दोनों को हॉस्पिटल पहुंचाया।

डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि पूनम की हालत बयान देने लायक नहीं है। 26 जनवरी को उसने पुलिस को बयान दर्ज कराया। उसने बताया कि उसकी चाची का भाई रामकुमार काफी दिनों से उसे परेशान कर रहा है। पूनम तैयार नहीं हो रही थी तो रामकुमार ने इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लि

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  आई आई एन डेस्क  त्रिशूर
केरल के बीड़ी बिजनसमैन मुहम्मद निशाम को पुलिस ने  अरेस्ट कर लिया। निशाम पर एक सिक्यॉरिटी गार्ड की हत्या की कोशिश का आरोप है। पुलिस के मुताबिक उन्होंने गार्ड को अपनी ‘हमर’ कार से रौंद कर मारने की कोशिश की थी। गार्ड का कुसूर बस इतना था कि उसे गेट खोलने में थोड़ी देर हो गई थी।

पुलिस ने बताया कि गार्ड चंद्रबोस(52 साल) को गहरी चोटें आई हैं। उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। आरोपी निशाम तिरुनेलवेली बेस्ड बिजनसमैन है। वह केरल का प्रमुख टबैको बिजनसमैन हैं। इसके अलावा मिडिल ईस्ट देशों में उनका जूलरी और होटेल का भी कारोबार है। निशाम के पास एक से बढ़कर एक लग्जरी कारें हैं, जिनमें फरारी, जगुआर, रॉल्स रॉयस, रोड रेंजर और हमर शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक गुरुवार सुबह निशाम गुरुवार सुबह सोसायटी में आए। उस समय गार्ड से गेट खोलने में थोड़ी देर हो गई। इससे निशाम आग बबूला हो गए। पहले तो वह गार्ड पर चीखे फिर अपनी कार उसके पीछे दौड़ा दी। निशाम से बचने के लिए गार्ड गेट के पास लगे फव्वारे के पीछे भागा लेकिन निशाम ने उस पर अपनी हमर चढ़ा दी और दीवार की तरफ धक्का दिया। इतना ही नहीं, वह गार्ड पर लोहे की रॉड से हमला करते रहे। बाद में दूसरे सिक्यॉरिटी गार्ड्स ने उन्हें रोका।

पुलिस के मुताबिक, ‘निशाम पर कई आपराधिक केस दर्ज किए गए हैं। उस पर केरल ऐन्टि सोशल ऐक्टिविटीज प्रिवेंशन ऐक्ट( KAAPA) के तहत भी केस दर्ज किया गया है।’ इससे पहले भी उनपर कई आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। अप्रैल,2013 में उन्होंने अपने नौ साल के बेटे को फरारी चलाने को दे दी थी, जिसके बाद उनपर पुलिस केस हुआ था। इसके अलावा उन्होंने एक महिला सब-इंस्पेक्टर को अपनी कार में लॉक भी कर दिया था।

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आई आई एन डेस्क लखनऊ –

उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की मूर्तियां लगाने के विफल प्रयास के बाद अब हिन्दू महासभा देशभर के मंदिरों में गोडसे की मूर्ती लगाने की प्लानिंग कर रही है गौरतलब है कि हिंदू महासभा के मूर्तियां लगाने के प्रयास को यूपी पुलिस ने विफल कर दिया था !

मेरठ में नाथूराम गोडसे मूर्ति पर विवाद को लेकर जिला प्रशासन ने जिले में धारा 144 लगाई है हिंदू महासभा की घोषणा को देखते हुए पुलिस भी अलर्टहै

 

हिंदू महासभा शुक्रवार यानी महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर ही गोडसे की मूर्तियों को लगाना चाहती है लेकिन अपने प्लान के बारे में कुछ कहना नहीं चाहती। महासभा ने फैसला किया है कि वह मूर्तियां लगाने के अपने प्रोग्राम का प्रचार नहीं करेगी क्योंकि उसे लगता है कि ज्यादा मीडिया कवरेज उसके में रुकावट बन सकती है।

महासभा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक देशभर के मंदिरों में जल्द ही गोडसे की मूर्तियां दिखेंगी। इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे हिंदी भाषी राज्यों के मंदिरों से होगी। उन्होंने यह भी बताया कि वे इलाहाबाद में हुए महाकुंभ मेले के दौरान सैकड़ों साधुओं से मिले थे और उन्होंने महासभा का साथ देने का भरोसा दिलाया था। अब महासभा इन्हीं साधुओं के सपॉर्ट से मंदिरों में मूर्तियां लगाने की प्लानिंग कर रही है। हालांकि उन्होंने यह साफ किया कि गोडसे की मूर्तियां मंदिर के मुख्य हिस्से में नहीं होंगी ताकि उन्हें हिंदू भगवानों के साथ जोड़कर न देखा जाए। हिंदू महासभा ने जयपुर में कलाकारों से करीब 500 मूर्तियों मंगवाई हैं।

बता दें कि हिंदू महासभा की ओर से सीतापुर जिले में गोडसे का मंदिर बनाने और मेरठ में गोडसे की मूर्ति लगाने की पब्लिक अनाउंसमेंट के बाद यूपी पुलिस ने दोनों ही जगहों को सील कर दिया था। अब महासभा ने अपनी योजना में बदलाव करते हुए यह फैसला किया है कि वह पहले देशभर में गोडसे की मूर्तियां लगाएगी और उसके बाद मीडिया को इस बारे में जानकारी दी जाएगी।

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आई आई एन डेस्क मुंबई – ठाणे जिले में एक उर्दू अखबार की संपादक शिरीन दलवी को फ्रांस की मैगजीन शार्ली एब्दो के विवादित कार्टूनों को छापने के आरोप में मुकदमा दर्ज करके बुधवार को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, उन्हें कल ही ठाणे की अदालत से जमानत मिल गई।

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता नुरसत अली ने 15 दिन पहले उर्दू अखबार ‘अवधनामा’ की संपादक शिरीन दलवी के खिलाफ मुंब्रा पुलिस से शिकायत दर्ज कराई थी। नुरसत अली ने आरोप लगाया था कि शिरीन दलवी ने ‘शार्ली एब्दो’ में छपे कार्टूनों को अपने अखबार में फिर से छापा था।

चार दिन पहले राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के सदस्यों ने भी शिकायतकर्ता के साथ मिलकर मुंब्रा पुलिस स्टेशन में सीनियर इंस्पेक्टर को शिकायती पत्र दिया था और संपादक की गिरफ्तारी न होने पर थाने के बाहर आंदोलन की धमकी दी। शिरीन दलवी के खिलाफ आईपीसी की धारा 295 ए के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच के बाद बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

मुंब्रा पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर ने बताया, ‘हमने महिला संपादक को गिरफ्तार करने के बाद ठाणे की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई और वह रिहा हो गईं।’

अखबार में कार्टून छपने के बाद मुंबई के उर्दू पत्रकार संघ ने भी दलवी की गिरफ्तारी की मांग की थी। पुलिस के अनुसार, कई अन्य पाठकों ने मुंबई और ठाणे में इस अखबार में शार्ली एब्दो के कार्टूनों को छापने पर शिकायत की थी।

ओपिनियन

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Four Professors of IIT-Kanpur got a reprieve from the Allahabad High Court on Wednesday when it stayed action against them in connection with harassment...

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