स्वास्थ्य

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आई आई एन डेस्क –

अगर बच्चा बचपन में ही हेल्दी हैबिट्स को फॉलो करना सीख जाए, तो ये उसके लिए जिंदगीभर फायदेमंद साबित होंगी। पैरंट्स के तौर पर आप उनमें हेल्दी हैबिट्स डिवेलप करने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए आपको उठाने होंगे ये आसान कदम :

बनें रोल मॉडल : रोल मॉडल बनने के लिए आपको परफेक्ट बनने की जरूरत नहीं है। बस अपनी ऐक्टिविटीज सही करने की जरूरत है। अगर बच्चे आपको कुछ हेल्दी खाते देखेंगे, तो वे भी हेल्दी ही खाएंगे। अगर वे आपको फिजिकल ऐक्टिविटी में हिस्सा लेते हुए दिखेंगे, तो उनमें भी फिजिकल ऐक्टिविटी में हिस्सा लेने की इच्छा जागेगी। इस तरह आप उनके जेहन में अच्छी सेहत का एक लक्ष्य बिठा देंगे।

पॉजिटिव रहें : बच्चों को यह न बताएं कि वे क्या नहीं कर सकते। इसकी बजाय उन्हें बताएं कि वे क्या कर सकते हैं। इनमें अगर फन भी शामिल हो, तब तो बस मजा ही आ जाए। अच्छे काम के लिए सबको तारीफ सुनना पसंद होता है। ऐसे में उनकी तारीफ करें और पॉजिटिव एनर्जी भरें।

फैमिली को रखें साथ : पूरे परिवार के साथ घूमने का प्लान बनाएं। अपने घर की हर ऐक्टिविटी में फैमिली को शामिल करें। एक्सर्साइज से लेकर घर के कामों तक में फैमिली की हेल्प करें। इससे बच्चों के मन में साथ रहने का संदेश जाएगा।

व्यवहारिक रहें : जिंदगी में कल्पानाओं की उड़ान को छोड़ते हुए रीयलिस्टिक गोल डिसाइड करें। रोज थोड़ी-थोड़ी एक्सर्साइज करें और अपनी हेल्थ में थोड़े समय बाद बड़ा चेंज नोटिस करें।

टीवी, कंप्यूटर और विडियो गेम को सीमित करें : अगर आप बच्चे के सामने ज्यादा टीवी देखेंगे या कंप्यूटर पर काम करेंगी, तो यही आदत आपका बच्चा भी सीखेगा। इस तरह देर तक एक ही जगह बैठने वाले काम से शरीर में आलस और फिजिकल परेशानियां जन्म लेती हैं।

फिजिकल ऐक्टिविटी को बढ़ावा दें : अपने बच्चे को उसकी पसंदीदा फिजिकल ऐक्टिविटी में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करें। हालांकि ध्यान रखें कि बच्चे को उस ऐक्टिविटी में मजा आना चाहिए। बच्चा जो भी एंजॉय करे उसे उस ऐक्टिविटी में आगे बढ़ाने की कोशिश करें।

इनाम दें सोच-समझकर : अच्छे काम के लिए बच्चों को टीवी, विडियो गेम, कैंडी, स्नैक्स वगैरह इनाम में देने से बचें। बच्चों के अच्छे काम को प्रोत्साहित करने के कुछ दूसरे तरीके तलाशें।

डिनर टाइम में सब साथ हों : डिनर टाइम को फैमिली टाइम की तरह ट्रीट करें, जिसमें परिवार का हर सदस्य शामिल हो। इस समय चूंकि परिवार का हर सदस्य मौजूद होता है, तो बच्चों के कुछ गलत खाने की संभावनाएं थोड़ी कम हो जाती हैं। साथ ही उन्हें फैमिली के साथ टाइम बिताने का मौका भी मिलता है।

खेलें फूड लेबल रीडिंग गेम : सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन अगर घर का हर सदस्य अपनी सेहत और खाने को लेकर कॉन्शस होगा तो बच्चे इससे काफी कुछ सीखेंगे जो उनकी सेहत पर जिंदगीभर असर डालेगा।

इनवॉल्व रहें : अपने बच्चे की सही सेहत के लिए उसके साथ रहें। उन्हें अच्छा खाने के लिए प्रोत्साहित करें। इस बात को सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा जो भी खाए, उसका उसकी सेहत पर पॉजिटिव असर पड़े

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लंदन-
ब्रिटेन तीन माता-पिता के डीएनए से जन्मे बच्चों को वैध ठहराने वाला पहला देश बन गया है। मंगलवार को तीन लोगों के डीएनए से आईवीएफ बेबी के जन्म को कानूनी मान्यता देने के प्रस्ताव पर ब्रिटिश संसद हाउस ऑफ कॉमंस ने मुहर लगाई।

मौजूदा आईवीएफ संबंधी कानून में बदलाव के प्रस्ताव पर संसद के निचले संसद में 90 मिनट की बहस के बाद हुए मतदान में 382 सांसदों ने वोट डाला, 128 ने इसका विरोध किया। अब अगले साल तक पहला ‘दो माताओं और एक पिता वाला बच्चा’ जन्म लेने की उम्मीद है। इससे हर साल 150 जोड़ों को फायदा होने की उम्मीद है।

इस विवादित विषय पर सोशल वर्कर्स और धार्मिक नेताओं के बीच मतभेद था। चर्च के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी प्रक्रिया खत्म करने की मांग की थी। मंगलवार को ब्रिटिश सांसदों ने संसद में बेहद अहम मतदान में भाग लेकर इस बात का फैसला किया कि तीन लोगों (माता, पिता और एक महिला डोनर) से डीएनए के जरिए आईवीएफ बच्चों को पैदा करने की अनुमति दे दी जाए।

इस तकनीक का मकसद घातक आनुवांशिक रोगों को मां से बच्चे तक जाने से रोकना है और इससे एक साल में करीब 150 कपल्स को फायदा होने की उम्मीद है। इस विषय को लेकर ब्रिटेन में काफी विरोध के स्वर भी उठे थे।

कानून में प्रस्तावित बदलाव के तहत, ‘इन विट्रो’ निषेचन प्रणाली (आईवीएफ) में और माता पिता से सामान्य डीएनए लेने की स्थिति में एक अन्य महिला डोनर के स्वस्थ एम (मिटोकांड्रियाल) डीएनए की थोडी मात्रा भी शामिल की जाएगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि दूसरी महिला के एम डीएनए के उपयोग से नुकसानदेह एमडीएनए अगली पीढ़ी में जाने के खतरे से ब्रिटेन की 2500 महिलाओं का बचाव किया जा सकेगा।

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Ashok Gehlot

आई आई इन डेस्क जयपुर –

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को स्वाइन फ्लू हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर खुद इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा है कि वक्त पर इलाज शुरू होने से अब बेहतर महसूस कर रहा हूं। गौरतलब है कि राजस्‍थान में स्वाइन फ्लू कहर बरपा रहा है और अब तक इससे 38 लोगों की जान जा चुकी है।

गहलोत ने नाकाफी इंतजाम होने पर राजस्थान सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने पूछा है कि वक्त पर जागरूकता अभियान क्यों नहीं चलाया गया। उन्होंने लिखा है, ‘लोगों को जानकारी के अभाव में मौत का शिकार होना पड़ रहा है। पिछली सरकार में जब पहला मामला सामने आया था, हमने उसी वक्त स्वाइन फ्लू की फ्री जांच शुरू कर दी थी।’

 

गहलोत ने लिखा है कि इस बार नाटक किए जा रहे हैं और स्वाइन फ्लू की फ्री जांच के आदेश तीन दिन बाद लागू हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि प्रशासन और शासन कितने गंभीर हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल सवाई मान सिंह का राजधानी में यह हाल है तो बाकी जिलों में हालात क्या होंगे।

राजस्थान के 22 जिले स्वाइन फ्लू की चपेट में आ चुके हैं। राजधानी जयपुर में स्वाइन फ्लू का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। हाल ही में लिए गए 167 सैंम्पल्स में से 45 पॉजिटिव मिले थे। यहां पर 11 मरीजों ने इलाज के दौरान दम तोड़ा है। इसके बाद नागौर में संभावित 28 सैंपल्स में से 10 पॉजिटिव पाए गए और यहां पर 4 मरीजों को जान गंवानी पड़ी है। धीरे-धीरे अन्य जिलों में भी स्वाइन फ्लू पैर पसारता नजर आ रहा है।

ओपिनियन

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