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 आई आई एन डेस्क पटना

बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाए जाने की चर्चाओं के बीच जीतन राम मांझी ने खुलकर बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव द्वारा 7 फरवरी को बुलाई गई जेडी (यू) विधायक दल की बैठक को ही ‘अनाधिकृत’ घोषित कर दिया।

मांझी ने पार्टी नेतृत्व को आंख दिखाते हुए कहा, ‘इस तरह की बैठक बुलाने का अधिकार सिर्फ मुझे यानी विधायक दल के नेता को है।’ उन्होंने ऐलान किया कि वह इस बैठक में शामिल नहीं होंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनके इस्तीफे की खबर बेबुनियाद है, जिसका वह खंडन करते हैं। मांझी के खास सहयोगी शकुनि चौधरी ने मांझी का समर्थन करते हुए कहा कि मांझी आग हैं और जो उन्हें छुएगा जल जाएगा

इससे पहले बिहार में संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने बताया था कि जेडी (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के कहने पर शनिवार को पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। उक्त बैठक के अजेंडे के बारे में पूछे जाने पर श्रवण ने कहा कि उसमें वर्तमान राजनीतिक हालात पर चर्चा होगी।

आई आई एन डेस्क नई दिल्ली –

भारतीय जनता पार्टी अगर दिल्ली में हारती है तो क्या यह प्रधानमंत्री मोदी की हार होगी? पार्टी के सीनियर नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने तो मोदी के सिर ठीकरा फोड़ दिया है। उन्होंने कहा है कि हार-जीत कप्तान की होती है शत्रुघ्न सिन्हा पार्टी के प्रचार और नीतियों को लेकर ज्यादा खुश नहीं हैं। उन्हें लगता है कि हर्षवर्धन को बतौर नेता उतारा जाता तो अच्छा होता।

दिल्ली चुनाव में कई सर्वेक्षण बीजेपी की हार का अनुमान लगा रहे हैं। तभी से पार्टी नेता पीएम नरेंद्र मोदी के बचाव में बयानबाजी कर रहे हैं। बुधवार को तो पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कह दिया कि दिल्ली चुनाव प्रधानमंत्री पद का चुनाव नहीं है और इसे मोदी सरकार पर जनमत संग्रह न माना जाए। यही बात एक दिन पहले पूर्व बीजेपी अध्यक्ष वेंकैया नायडु भी कह चुके हैं।

लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा ने इस बात को खरे शब्दों में काटा है। एक न्यूज चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘देश में हर तरफ आज हमारे नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता है। वह देश की इच्छा के प्रतीक हैं। वह डैशिंग हैं, विजनरी हैं, दबंग हैं, चारों तरफ उनका बोलबाला है। अब जब वह सामने आ गए हैं तो जाहिर है कि जनमत संग्रह माना जाए या न माना जाए, लेकिन जहां भी वह होंगे तो जाहिर है कि सबसे पहले निगाह उन्हीं पर जाएगी क्योंकि कप्तान हैं वह। हां, यह भी सही है कि दिल्ली का चुनाव है, मुख्यमंत्री का चुनाव है।

सिन्हा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। उन्होंने कहा, ‘यकीनन उन्होंने अपनी ताकत का अहसासा कराया है। ऐसा न होता तो उनके चर्चे न हो रहे होते, वह टीवी पर छाए न होते। उन्होंने माहौल को एकदम गर्म कर दिया है।’

जब शत्रुघ्न सिन्हा से पूछा गया कि बीजेपी ने नेगेटिव पॉलिटिक्स का सहारा लिया तो भी पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपनी पार्टी का बचाव नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘मैं अपनी पार्टी के बारे तो नहीं कहूंगा लेकिन जो इन दिनों हुआ है, वह सही नहीं हुआ है, नेगेटिव पॉलिटिक्स ठीक नहीं है। फर्जी फंडिंग के आरोप लगाना, जवाब आ जाना कि गिरफ्तार कर लो, इस तरह का कटुता भरा माहौल ठीक नहीं है। हमारा विरोधी हमारा दुश्मन नहीं है। अगर वे चुनाव लड़ रहे हैं तो हमारी शुभकामनाएं हैं।’

सिन्हा ने माना कि किरन बेदी को लेकर पार्टी में नाराजगी है और हर्षवर्धन को उतारा जाता तो बीजेपी को फायदा होता। उन्होंने कहा, ‘दबी जुबान से हम भी ऐसी बातें सुनते हैं किरन बेदी को लेकर पार्टी में नाराजगी है। हर्षवर्धन होते तो अच्छा होता, उनका ट्रैक रिकॉर्ड भी अच्छा है। लेकिन पार्टी का फैसला अगर पार्लमेंट्री बोर्ड के जरिए होता और फैसले पर ठप्पा लग जाता तो अच्छा होता। लेकिन अब उतार दिया है तो हम उसकी सराहना करते हैं। चुनाव के नतीजे के बाद कार्यकर्ताओं की नाराजगी पर विचार होगा और जो भी डैमेज कंट्रोल हुआ उसे ठीक करने की कोशिश होगी।’

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 आई आई एन डेस्क पटना –

विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर जनता को ‘सुशासन’ का अहसास दिलाने के लिए नीतीश कुमार दोबारा सीएम की कुर्सी संभाल सकते हैं। इस राह में आ रही बड़ी बाधा पार कर ली गई है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, जेडीयू लीडरशिप को इसके लिए लालू प्रसाद यादव की तरफ से ग्रीन सिग्नल मिल गया है। इससे जदयू के लिए अब जीतनराम मांझी की जगह नीतीश को दोबारा सीएम बनाने का रास्ता खुल गया है।

सूत्रों का कहना है कि पिछले हफ्ते जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने लालू प्रसाद यादव से मुलाकात कर मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा की थी। आरजेडी चीफ लालू यादव ने इस बैठक में साफ कर दिया कि यह जेडीयू पर निर्भर करता है कि वह किसे विधायक दल का नेता चुनती है। उन्होंने साफ कहा है कि सांप्रदायिक ताकतों के रोकने के लिए वह जेडीयू को आगे करने के लिए तैयार है। उन्हें कोई आपत्ति नहीं अगर जेडीयू नीतीश को दोबारा सीएम बनाती है।

पिछले साल लालू के नीतीश को सपोर्ट न करने के चलते जेडीयू ने जीतन राम मांझी को सीएम बनाया था। तब से लेकर अब तक स्थिति काफी बदल चुकी है। पिछले सात महीनों के इस समय में नीतीश और लालू अपनी सालों की कड़वाहट और राजनीतिक शत्रुता को भूलाते हुए एक साथ काम कर रहे हैं। वहीं, पिछले कुछ समय में जीतन राम मांझी के मोदी के पक्ष में दिए गए बयानों ने भी जेडीयू के लिए मुश्किल पैदा की। साथ ही जेडीयू को नीतीश को लाने का मौका दिया। साफ है कि लालू ऐसी किसी आदमी को सपोर्ट नहीं कर सकते को नरेंद्र मोदी को लेकर नरम रुख रखता हो।

बीजेपी से गठबंधन टूटने के बाद जदयू के सरकार में बने रहने के लिए आरजेडी का सपोर्ट जरूरी हो गया था। राज्य में इस साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं।

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आई आई एन डेस्क नई दिल्ली –

अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। केजरीवाल के आरोप से चुनाव आयोग में हलचल मच गई। आयोग बिना किसी सबूत के वोटरों के मन में भ्रम पैदा करने के लिए ‘आप’ संयोजक के खिलाफ कार्रवाई करने का मन बना रहा है।

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि दिल्ली कैंट विधानसभा क्षेत्र में ईवीएम ने सोमवार को हुए मॉक पोल में ठीक तरह से वोटों को रजिस्टर नहीं किया है। उनके ट्वीट ने चुनाव आयुक्त विनोद जुत्शी को परेशान कर दिया और उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी और भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड के इंजिनियरों से इस मामले पर जवाब मांग लिया। पोल पैनल में मौजूद उच्च पदस्थ सूत्रों ने केजरीवाल के आरोपों को खारिज कर दिया है।

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने नाम ने जाहिर करने की शर्त पर बताया, ‘दिल्ली कैंट में एक भी ईवीएम में गड़बड़ी नहीं थी। यहां करीब 190 पोलिंग बूथ हैं। वास्तव में इस विधानसभा क्षेत्र में मौजूद हर ईवीएम ऐसी हैं, जिनका वोटर वेरिफाइड पेपर ट्रेल ऑडिट या VVPAT है। हमारे पास इस अच्छी तरह से हुए मॉक पोल का प्रूफ है।’

आोयग के एक सीनियर अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, ‘लोग अक्सर आरोप लगाते हैं कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ हुई है, लेकिन आज तक कोई इसे साबित नहीं कर पाया है। 2010 में जब इसी तरह की कोशिश की गई थी, हमने उनके लिए ईवीएम के एक ओपन टेस्ट का आमंत्रण रखा था। उस वक्त सब संदेह धराशायी हो गए थे। इस तरह के संदेह फिर से उठाने की कोई वजह नहीं है।’

हालांकि, लोकसभा चुनाव के समय में कुछ ईवीएम में समस्या की रिपोर्ट आई थी। गुवाहाटी में एक ईवीएम में किसी भी बटन को दबाने पर वोट बीजेपी के पक्ष में ही जाते थे, लेकिन चुनाव आयोग का कहना था कि पुरानी मशीन की वजह से यह समस्या हुई थी। अधिकारी ने बताया, ‘2006 से पहले खरीदी गईं मशीनों में ऐसी समस्या हो सकती है, लेकिन अब हम उन ईवीएम को चरणों में हटा रहे हैं। दिल्ली में इस्तेमाल होने वाली सारी मशीनें 2006 के बाद की हैं। इसलिए किसी भी पार्टी को चिंतित होने की जरूरत नहीं है।’

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आई आई एन डेस्क जयपुर: राजस्थान पंचायत चुनाव में इस बार महिला शक्ति का प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। वैसे राज्य में पंचायती राज में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण है, लेकिन अब उससे कहीं ज़्यादा महिलाएं लोकतंत्र की इस पहली कड़ी में ज़िम्मेदारियां संभाल रही हैं।
हाल ही में आए राजस्थान सरकार के अध्यादेश के अनुसार पंचायतों में सरपंच का आठवीं पास होना ज़रूरी है, और पहली बार देश में इस नियम के साथ राजस्थान में ये चुनाव हुए हैं। अब तक चुने गए सरपंचों में से 48 फीसदी आठवीं पास तो हैं ही, लेकिन 36 प्रतिशत ग्रेजुएट हैं, और 10 फीसदी ने पोस्ट ग्रेजुएशन किया है, तथा एक प्रतिशत सरपंच डॉक्टरेट किए हुए भी हैं।

इसका बढ़िया उदाहरण हैं 21-वर्षीय अंजू यादव, जो गंगानगर में कॉलेज की पढ़ाई कर रही है और साथ ही माननीवाली ग्राम पंचायत की सरपंच बनी हैं। उनसे कुछ ही किलोमीटर दूर लीलवाली गांव में 21-वर्षीय वसुंधरा सरपंच चुनी गई हैं, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही हैं।

अंजू कहती हैं, उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा, “मैं युवा भाई-बहनों को बताने की कोशिश करूंगी कि भ्रष्टाचार मत फैलाओ, जो गलत काम कर रहा है, उसके खिलाफ आवाज़ उठाओ, तभी भारत भ्रष्टाचारमुक्त होगा…”

राजस्थान के कई जिलों में कुछ ऐसा ही बदलाव दिखाई दे रहा है। नागौर जिले की जाहिल तहसील में तारनू गांव में सरपंच, उप-सरपंच, पंचायत समिति – सभी महिलाओं की बनी है, और वह भी निर्विरोध। इस 13-सदस्यीय समिति में से 10 साक्षर हैं। चुनी गई एक वृद्धा का कहना है, “हमें सरकार बनाया है, तो हम अच्छा काम करेंगे, लड़कियों को पढ़ाएंगे और गांव को बिलकुल साफ-सुथरा रखेंगे…” उन्हीं के साथ चुनी गईं संगीता का कहना है, “आजकल अनपढ़ों का ज़माना चला गया, लड़कियों का पढ़ना बहुत ज़रूरी है…”

वर्ष 2010 के पंचायत चुनावों में शिक्षा का यह नियम लागू नहीं था, इसलिए पंचायत समिति और सरपंचों में 50 फीसदी से भी कम पढ़े-लिखे थे, और इस बार भी राज्य में सात ऐसे गांव रहे, जहां आठवीं पास प्रत्याशी नहीं मिलने के कारण गांववाले सरपंच चुन ही नहीं सके। ऐसे ज़्यादातर गांव जनजातीय क्षेत्र में हैं।

लेकिन अगर पंचायत चुनावों में आ रहे नए नेतृत्व का विश्लेषण किया जाए तो यहां समाज की बदलती तस्वीर ज़रूर नज़र आती है, लेकिन क्या यह नई पीढ़ी और यह नया नेतृत्व गांव की हकीकत को बदल पाएगा।

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आई आई एन डेस्क नई दिल्ली –

बीजेपी की सीएम कैंडिडेट किरण बेदी के कृष्णा नगर स्थित दफ्तर पर सोमवार वकीलों ने हमला बोल दिया इसमें बीजेपी के दो से तीन कार्यकर्ताओं के घायल होने की खबर है। किरन बेदी ने भी ट्वीट कर इस हमले की जानकारी दी उन्होंने बताया कि मार्च के बाद वकीलों ने बेदी के दफ्तर पर हमला बोला। उनके मुताबिक ऑफिस में तोड़फोड़ के साथ बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई। हमले में दो से तीन कार्यकर्ता घायल हो गए।

कृष्णा नगर में किरन बेदी के कार्यालय प्रभारी के मुताबिक सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट से किरन बेदी के दफ्तर तक करीब एक हजार वकीलों ने मार्च निकाला था बीजेपी के कार्यकर्ताओं के मुताबिक प्रदर्शन कर रहे वकील किरन बेदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे भी लगा रहे थे।

किरन बेदी ने भी अपने ऑफिस पर हुए इस हमले की जानकारी ट्विटर के माध्यम से दी। बेदी ने ट्वीट किया, ‘मुझे बताया गया है कि मेरे चुनाव क्षेत्र कृष्णा नगर स्थित बीजेपी दफ्तर पर हमला हुआ है। इसमें कुछ के घायल होने के बारे में भी बताया गया है।’

26 साल पुरानी घटनाः बेदी से इसलिए नाराज हैं वकील……..
1988 की जिस घटना को लेकर वकीलों में किरन बेदी के खिलाफ इतना गुस्सा है, उसका खामियाजा खुद किरन बेदी को भी भुगतना पड़ा था। सेक्रेटरी दिव्य दर्शन शर्मा बताते हैं कि उस घटना की जांच के लिए गठित वाधवा कमिटी ने वकीलों के साथ बेदी के बर्ताव को गलत ठहराया था।

बेदी के दिल्ली पुलिस कमिश्नर न बन पाने की एक वजह यह भी रही। उस घटना की शुरुआत एक वकील की गिरफ्तारी से हुई थी। दिल्ली पुलिस ने वकील राजेश अग्नहोत्री को चोरी के इल्जाम में गिरफ्तार किया था।

अग्निहोत्री को हथकड़ी पहनाकर ले जाया गया, जिससे वकील समुदाय का गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने बेदी के दफ्तर के बाहर विरोध प्रर्दशन किया। उस समय वह डीसीपी नॉर्थ थीं। वकीलों का कहना था कि गिरफ्तारी के जायज कारण होने के बावजूद एक वकील को हथकड़ी नहीं लगाई जानी चाहिए।

पुलिस ने वकीलों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। इससे वकील समुदाय और भड़क उठा। घटना की जांच के लिए केंद्र सरकार ने जस्टिस डी. पी. वाधवा कमिटी गठित की। कमिटी ने वकीलों के साथ बेदी के उस बर्ताव की निंदा की। इसके बाद वकीलों ने बेदी के ट्रांसफर की मांग तेज कर दी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

 

 

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आई आई एन डेस्क  कोलकाता-
पश्चिम बंगाल में 34 युवा 27 जनवरी से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इनका सिलेक्शन बंगाल स्कूल सर्विस कमिशन (एसएससी) में हो गया है, सफल उम्मीदवारों की लिस्ट में इनका नाम भी है लेकिन अभी तक उनकी नियुक्ति नहीं की गई है। इससे नाराज होकर ये भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इनमें से दो लोग शनिवार को बीमार पड़ गए। इन्हें बिंधाननगर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

धरना दे रहे उम्मीदवार गवर्नर केसरीनाथ त्रिपाठी से मिलने भी गए थे लेकिन उन्हें कहा गया कि गवर्नर आज ऑफिस नहीं आए हैं। हालांकि उन्हें बताया गया कि गवर्नर ने उनसे भूख हड़ताल खत्म करने को कहा है। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि गवर्नर इस मसले को देखेंगे। इसके बावजूद उन्होंने अपनी हड़ताल खत्म नहीं की क्योंकि इससे पहले भी दो बार उन्हें झूठा दिलासा दिया जा चुका था। अब ये युवा मांग कर रहे हैं कि या तो इन्हें अपॉइंटमेंट लेटर दिया जाए या डेथ सर्टिफिकेट।

एक प्रदर्शनकारी अजीजुल हक ने बताया,”मेरे जैसे कई युवाओं ने 2012 में एसएससी का टेस्ट दिया था। रिजल्ट 2013 में आया लेकिन अब तक हमें अपॉइंटमेंट लेटर नहीं मिला है और न ही जॉब मिली है।”प्रेजिडेंसी कॉलेज और जादवपुर यूनिवर्सिटी के कई छात्रों भी रविवार को इस प्रदर्शन में शामिल हो गए। जादवपुर यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट ने बताया,”हम लोगों ने एकता दिखाने के लिए इन छात्रों का साथ देने का फैसला किया।”

पुलिस पर आरोप है कि वह प्रदर्शनकारियों का साथ देने वालों को भी कमिशन बिल्डिंग के भीतर प्रवेश नहीं करने दे रही है। प्रदर्शन कर रहे रेजाउल मोंडल ने कहा,”हम पिछले छह दिनों से बाहर बैठे हैं। वे हमें छांव तक देने को तैयार नहीं हैं। पुलिस ने बिल्डिंग के अंदर पीने का पानी ले जाने पर भी रोक लगा दी। प्रदर्शनकारियों को गंदा पानी पीना पड़ा जिससे वह बीमार पड़ गए। हमें फोन चार्ज करने की भी सुविधा भी नहीं दी जा रही है ताकि हम बाहर के लोगों से बात न कर सकें।”

वहीं गवर्नर ने कहा,”मुझे इस बारे में कोई जानकारी या शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर ही मैं ये फैसला कर पाऊंगा कि प्रदर्शकारियों की मांग जायज है या नहीं।

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आतंकवाद को इस्लाम से जोडना गलत : दलाई लामा

आई आई एन डेस्क फर्रुखाबाद
तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने कहा कि भले ही आतंकवाद आज विश्व की सबसे बडी समस्या के रूप में उभरा हो, लेकिन उसे इस्लाम से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि सभी मुस्लिम आतंकवादी या उसके पोषक कतई नहीं हैं।
दलाई ने बौद्ध स्तूप ‘संकिसा’ में श्रीलंका, म्यामांर, कम्बोडिया, भूटान, जापान, ताईवान तथा कोरिया समेत 27 देशों के बौद्ध अनुयायियों को संबोधित किया। उन्होंने भगवान बुद्ध की शांति और भाईचारे की प्रतिज्ञा लेने की अपील की। साथ ही महात्मा गांधी को याद करते हुए विश्व शांति के लिये आतंकवाद के खात्मे को भी जरूरी बताया।

आध्यात्मिक गुरु ने एक अन्य आयोजन में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा अपनी हाल की भारत यात्रा के दौरान दी गई उस नसीहत से असहमति जतायी जिसमें कहा गया था कि अगर भारत धार्मिक कट्टरता छोड़ दे तो वह ज्यादा प्रगति कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में तो हमेशा से धार्मिक और सांप्रदायिक सौहार्द रहा है। हिन्दुस्तानी पूरी दुनिया में इसके लिये विख्यात है। दलाई ने चीन का जिक्र करते हुए कहा कि वह आर्थिक रुप से संपन्न देश है और उसके भारत के साथ सांस्कृतिक सम्बन्ध रहे हैं, लिहाजा उसे हिन्दुस्तान के साथ सहयोगात्मक रुख अपनाना चाहिए।

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Kendrapara (Odisha) : A woman sarpanch in Kendrapara district of ...

आई आई इन डेस्क जयपुर-
​ हनुमान चौधरी (27 साल) के पिता की एक फोन कॉल ने उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। हनुमान ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट रिजॉर्ट में मैनेजर के तौर पर काम करते थे। पिता की कॉल आने के बाद वह गांव में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए राजस्थान वापस आ गए।

हनुमान के पिता भूरा राम ने उन्हें इसलिए वापस बुलाया क्योंकि वह खुद चुनाव नहीं लड़ कत थे। राजस्थान सरकार ने पंचायत चुनाव के उम्मीदवारों के लिए शैक्षणिक योग्यता निर्धारित कर दी थी। नए नियम के मुताबिक पंचायत का चुनाव लड़ने के लिए कम से कम 10 वीं क्लास तक पढ़ा होना जरूरी थी जबकि उन्होंने सिर्फ 8वीं तक ही पढ़ाई की थी। नए नियम की वजह से गांव के तकरीबन 85 फीसदी लोग चुनाव नहीं लड़ सकते थे। राजस्थान हाई कोर्ट ने भी सरकार के नियम में दखल देने से मना कर दिया था।

हनुमान चौधरी ने एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा,”मेरे पिता ने जब मुझे फोन किया तो मैंने अपने भाई से इस बारे में बात की। उसने मुझसे कहा कि अगर तुम समाज सेवा करना चाहते तो यहां आ जाओ। इसके बाद मैं वापस गांव आ गया। मैंने पंचायत चुनाव लड़ा और 6000 वोटों से जीत भी हासिल की। ऑस्ट्रेलिया में मेरी ऐनुअल इनकम दो करोड़ रुपये थी।”

हनुमान ने चुनाव से पहले डोर-टु-डोर कैंपेन लॉन्च किया था। उन्होंने बताया,”मुझे पता था कि मेरे गांव में जांति-पांति का मसला काफी उलझा हुआ है। मेरा कैंपेन कई मामलों में अलग था। मैंने किसी से जाति के आधार पर वोट डालने की अपील नहीं की। मैंने न ही जाति की बात की ना ही राजपूत और जाटों के बीच दुश्मनी की। मैंने हर शख्स से विकास के मुद्दों की बात की। मैं जाट समुदाय से आता हूं। मेरे विरोधी उम्मीदवार राजपूत थे। राजस्थान की राजनीति में जाटों और राजपूतों में हमेशा से दुश्मनी रही है।”

युवा, शिक्षित और इंग्लिश-स्पीकिंग हनुमान ने वोटर्स को प्रभावित किया और चुनाव जीत लिया। गांव के मंगरा राम(23 साल) ने कहा,”अगर कोई अशिक्षित व्यक्ति सरपंच बनता है तो वह जयपुर जाकर ऑफिसरों और मंत्रियों से बातचीत नहीं कर पाएगा।” हनुमान चौधरी ने भले ही गांव के लोगों को प्रभावित किया हो और चुनाव जीत लिया हो लेकिन गांव की जातीय राजनीति और बेहाल गांव अभी भी उनके सामने चुनौती बनकर खड़ा है।

 

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आई आई इन डेस्क  मुंबई
समलैंगिकता पर सरकारी रवैये को ललकारते हुए दो समलैंगिक जोड़ों ने ‘गे प्राइड मार्च’ में शादी कर ली। शनिवार को अगस्त क्रांति मैदान में हुए ‘गे प्राइड मार्च’ के दौरान ये दोनों ‘मर्द जोड़ा’ लोगों के लिए चर्चा का विषय रहा।

इनमें से एक जोड़ा चार साल तक एक साथ रहे थे। शनिवार को 27 वर्षीय मिलिंद और वैभव ने अपने एक कॉमन फ्रेंड के यहां शादी की। इस शादी में दोनों के लगभग 20 करीबी साथी शरीक हुए इस अनोखी शादी की मजेदार बात यह रही कि इसकी रस्म अदायगी संस्कृत के एक स्कूल शिक्षक ने की। एक समान लिंग की शादी को ध्यान में रखते हुए शिक्षक ने संस्कृत के मंत्रों में बदलाव किया और शादी करवाई।

फिल्म निर्माता और ऐनिमेटर वैभव ने कहा, ‘हर किसी का सपना होता है, अपने प्यार के साथ शादी। जो भी पारंपरिक अनुष्ठान शादी में होते हैं, जैसे हवन, फेरे, हल्दी, मेंहदी, सब कुछ हमने किया। इससे हमें कॉन्फिडेंस आएगा और हम अपने परिवार वालों का सामना कर पाएंगे।

28 वर्षीय हितेश और 22 साल के व्रशांक का कहना है कि इन्होंने शादी बस प्रतीक के तौर पर की है। इन्होंने यह भी स्वीकर किया कि अपने जैसे लोगों और पुलिस की मौजूदगी के कारण ही खुले तौर पर ये ‘गे प्राइड मार्च’ में हिस्सा ले सक

ओपिनियन

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Four Professors of IIT-Kanpur got a reprieve from the Allahabad High Court on Wednesday when it stayed action against them in connection with harassment...

स्वास्थ्य