राजनीति

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गुजरात विधानसभा चुनाव में विजयपताका फहराने के लिए भाजपा कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाह रही है. इसके लिए पार्टी गुजरात के मुसलिम वोटरों को भी अपने पाले में करने के लिए हर प्रयास कर रही है. मुंबई से 500 मुस्लिम पार्टी कार्यकर्ताओं की टीम सूरत कूच के लिए तैयार है. यह टीम वहां घर-घर जाकर लोगों को पार्टी के पक्ष में प्रचार करेगी.

5 नवंबर को टीम सूरत जाएगी

इन कार्यकर्ताओं को सूरत में प्रचार के लिए बाकायदा प्रशिक्षित किया जा रहा है. मुंबई के बांद्रा स्थित कार्यालय में कैडर को इसके लिए तैयार किया जा रहा. भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के उपाध्यक्ष हैदर आजम ने बताया कि पहले चरण में 250 कार्यकर्ता 5 नवंबर को मुंबई से सूरत रवाना हो जाएंगे. उन्होंने बताया कि सूरत में कुल 12 विधानसभा सीटें हैं. 25000-50000 मुस्लिम मतदाताओं वाला क्षेत्र हमारी प्राथमिकता में है. हम हर बूथ पर जाकर वहां स्थित मदरसा के ट्रस्टी से मिलकर स्थानीय मुद्दों को जानकर उसके हिसाब से कैंपेन चलाएंगे.

मुस्लिम प्रत्याशी न होने से निराश नहीं

उन्होंने कहा कि हालांकि हमारे सामने एक बड़ी चुनौती है भाजपा की सूची में मुस्लिम प्रत्याशियों का न होना, लेकिन इससे हमारे कार्यकर्ताओं के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ता है. सीट का निर्धारण संसदीय बोर्ड करता है. इसमें कोई कुछ नहीं कर सकता. एक कार्यकर्ता के लिए सिर्फ पार्टी की जीत मायने रखती है. हर कार्यकर्ता सिर्फ जीत के लिए काम कर रहा है.

शिक्षा, रोजगार, व्यापार और सुरक्षा मुख्य मुद्दा

हैदर आजम ने बताया कि मुस्लिमों के लिए शिक्षा, रोजगार, व्यापार और सुरक्षा हमारे कैंपेन में मुख्य मुद्दे हैं. उन्होंने कहा कि अन्य लोग गोरक्षा जैसी बातों को लाकर मुख्य मुद्दे के लोगों को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों से गुजरात पूरी तरह से दंगा मुक्त रहा है. यहां मुस्लिमों के लिए व्यापार करने का बेहतर माहौल है.

अभियान अब तक सफल

बीजेपी की महिला मोर्च की एक कार्यकर्ता ने कहा कि हम लोगों को भाजपा का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. हमारा अभियान अब तक सफल रहा है. उन्होंने अपनी रणनीति के बारे में बताया कि हम प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के मुद्दों की रिपोर्ट तैयार कर उसे उम्मीदवारों को देते हैं, ताकि उसके हिसाब से ही कैंपेन चलाया जा सके.

 

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आम आदमी पार्टी के ओखला से विधायक अमानतुल्ला खान का निलंबन बहाल कर दिया गया है. कुमार विश्वास को बीजेपी एजेंट बताने पर पहले पोलिटिकल अफेयर कमेटी से हटाने के साथ-साथ पार्टी से अमानतुल्ला खान को निलंबित कर दिया गया था.

अमानतुल्ला खान के बयान को लेकर खड़े हुए विवाद का असर कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल के रिश्तों पर भी दिखा. विवादित बयान के बाद कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल के बीच कथ‍ित तौर पर शीत युद्ध भी देखने मिला था.

भड़क गए कुमार विश्वास

आप विधायक अमानतुल्ला की वापसी पर कुमार विश्वास ने भड़क गए हैं. उन्होंने कहा है कि अमानतुल्ला सिर्फ एक मुखौटा है, मैं नीम की तरह कड़वी दवा हूं. मैंने तो बैक टू बेसिक का नारा दिया था, लेकिन कुछ लोगों को पसंद नहीं आया है. दो नवंबर को जो बैठक है उसके वक्ताओं में मेरा नाम नहीं है.

विश्वास ने कहा कि राजनीतिक साइड लाइन की परंपरा पुरानी है, पहले मयंक गांधी और अंजलि दमानिया के साथ भी ऐसा ही हुआ था. मेरे लिए अमानतुल्ला या राज्यसभा मुद्दा नहीं है. कई राष्ट्रहित के मुद्दों पर मैं पार्टी में अकेला पड़ गया था.

उन्होंने कहा कि मेरे दरवाजे से राज्यसभा की कई सीटें वापस गई हैं, दूसरी पार्टी से आए लोगों की वजह से हम भी बीजेपी और कांग्रेस की तरह बन रहे हैं. हमें पीछे लौटकर देखना होगा, मेरे ऊपर निजी हमलों से कुछ नहीं होगा. उन्होंने कहा कि मैं बेहतर उम्मीदवार हूं, हमें विकल्प की राजनीति के लिए चुना था.

विश्वास ने कहा कि केजरीवाल से बात हुई है या नहीं ये मैं नहीं बताऊंगा. नेशनल काउंसिल में बोलने वाले वक्ताओं में मेरा नाम नहीं, कार्यकर्ता चाहेंगे तो जरूर बोलूंगा.

उस वक्त हालात इतने बिगड़ गए थे कि अमानतुल्ला खान के बयान से नाराज कुमार विश्वास को मनाने के लिए मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल को आधी रात गाजियाबाद स्थ‍ित कुमार विश्वास के घर  भी जाना पड़ा था.

कपिल मिश्रा ने साधा निशाना

अमानतुल्ला खां का निलंबन खत्म होने पर आप विधायक कपिल मिश्रा ने कुमार विश्वास पर निशाना साधा है. कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया,”अमानतुल्ला का निलंबन खत्म, मतलब जो भी अमानत ने @DrKumarVishwas के बारे में कहा उसे अब सच माना गया”.

कपिल मिश्रा ने कहा कि मैंने बार बार कहा आप इनके भ्रष्टाचार को कितना भी छिपा लो, ये आपको साजिशो में फंसायेंगे. भैया @DrKumarVishwas आपको अब खुलकर सच कहना होगा.

भैया @DrKumarVishwas – “डर के आगे जीत है” – अगर आप घुटने टेकने की जगह वीरता से सत्य के लिए खड़े होंगे तो मेरे जैसा हर कार्यकर्ता आपके साथ है.

अमानतुल्ला ने लगाए थे आरोप

30 अप्रैल को बयान जारी करने के बाद ‘आज तक’ से बातचीत में विधायक अमानतुल्ला खान ने कुमार विश्वास पर तीन बड़े आरोप लगाए थे. खान ने कहा था कि कैबिनेट मंत्री के घर में चार विधायकों की बैठक हुई थी.

वहीं कुमार विश्वास बीजेपी के इशारे पर पंजाब और एमसीडी के चुनाव में कैम्पेन करने नहीं आए थे. साथ ही टिकट बंटबारे में कुमार विश्वास मौजूद थे, लेकिन अब सवाल उठाकर एक षड्यंत्र रचा जा रहा है.

इस बयान पर हुआ था विवाद

जिस बयान से विवाद खड़ा हुआ था उसमें अमानतुल्ला खान ने आरोप लगाते हुए कहा था कि ‘कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी को हड़पना चाहते हैं और तोड़ना चाहते हैं. कुमार अपने घर में विधायकों को बुलाकर यह कह रहे हैं कि मुझे पार्टी का संयोजक बनवाओ, नहीं तो बीजेपी में चलो. बीजेपी हर एक को 30 करोड़ देने के लिए तैयार है.’

विश्वास पर पार्टी तोड़ने का गंभीर आरोप

जामिया से AAP विधायक ने कहा था कि मुझे लगता है ये सब बीजेपी के इशारे पर हो रहा है और इस काम के लिए इन्होंने 4 विधायक छोड़े हुए हैं. ये चारों विधायक AAP के विधायकों को कुमार विश्वास के घर ले जाते हैं, इस बात की तस्दीक AAP के तमाम विधायकों ने की.

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BJP is eyeing pan-India dominance as it has targeted to make inroads in states like West Bengal, Odisha, Andhra Pradesh, Telangana, Tamil Nadu and Kerala. But the party has so far failed to achieve its targeted number of full-timers to work in these states, according to Indian Express report. The ruling party at the Centre wanted to gain in the aforementioned states so that if it suffers losses in the Hindi belt, it will still be able to maintain upper hand in the Lok Sabha. BJP has started Vistarak (expansion)’ drive. But data on BJP chief Amit Shah-led ‘Pandit Deendayal Upadhyay Karya Vistar Yojana’ shows that the party has not been able to achieve its targeted number of full-timers to work in the constituencies of these states. The party could rope in just 470 full-timers, to work dedicatedly for six months to one year for the 1,109 constituencies in West Bengal, Odisha, Andhra Pradesh, Telangana, Tamil Nadu and Kerala. The data were presented during the recent party conclave late last month.

Shah himself had went on an intense 95-day nationwide campaign (April to September this year) on the Vistarak programme to mark the birth centenary year of Deendayal Upadhyay, wanted a full-timer for each Assembly constituency. According to the data, in poll-bound Karnataka — where the BJP is considered to have a strong organisational base — the party got only 51 full-timers for the 224 Assembly constituencies. Among them, only three are women, while it didn’t get a single minority member, either Christian or Muslim, for its campaign. The data says it needs at least 200 more full-timers in the state, scheduled to go to polls early next year.

In Andhra Pradesh, which has 175 constituencies, the party got only 16 full-timers for a year, and two for six months. For Telangana, (119 constituencies), the figure is 91; in Kerala (140 constituencies), which is considered a prestige battleground for Shah and the RSS, the party roped in just 31 full-timers for one year, and 10 for six months. For the 234-member Tamil Nadu Assembly, the party got 108 full-timers for one year, but data says the party requires 84 more. In West Bengal (294 Assembly constituencies), the party recorded only 93 full-timers. The BJP’s campaign in Odisha has yielded better results: it has got 119 full-timers to work for the party for six months to one year, the IE report says.

Shah is expected to draw full-timers to work until 2019 elections from those who had volunteered to dedicate six-12 months to party work as part of the Deendayal Upadhyay Vistarak project announced at the party’s national executive meeting in September last year.

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Patidar stir leader Hardik Patel on Monday called the Congress a “chor” (thief) and ruling Bharatiya Janata Party a “mahachor” (super thief) and said he will support the grand old party in order to defeat the saffron outfit in Gujarat, where the crucial assembly elections are due later this year.

“But have patience. Do not support (Congress) just now,” Patel said addressing a public rally at Mandal in north Gujarat, where he reached a couple of hours late on Monday night.

He also admitted he was present at a luxury hotel in Ahmedabad at the same time when the Congress’ vice president Rahul Gandhi checked into the premises but said he did not meet him amid swirling speculations they spoke to each other.

Patel, the face of influential Patidar community’s agitation for reservation in government jobs and admission to educational institutes, claimed he gave the meeting with Gandhi a miss owing to his busy schedule that included a roadshow and public rallies in north Gujarat.

Local television channels ran close-circuit television (CCTV) footage, which is available with the Hindustan Times, that showed Patel entering the Ummed Hotel late on Sunday night, and leaving through the back door in a brand new car without a registration plate at around 4pm the next day. Gandhi arrived at the same establishment around 1pm on Monday.

“After the Congress’s invite, I reached the hotel on Sunday at 3am. I met their (Congress) Gujarat in-charge (Gehlot). As it was too late, I decided to stay back at the hotel … But they (Bharatiya Janata Party) got the CCTV camera clips leaked because everything here (in Gujarat) is their (BJP) property,” the 24-year-old said.

“I can also explain why I reached so late here. I could not come out (of the hotel) due to media’s presence. I had not met Rahul Gandhi but the media would have claimed otherwise. But I did not meet (Pakistan’s Nawaz) Sharif at midnight like (Prime Minister Narendra) Modi,” he added.

The Congress had invited three young community representatives – OBC leader Alpesh Thakor, Dalit leader Jignesh Mewani and Patel – for talks with Gandhi during his visit to poll-bound Gujarat. While Thakor officially joined the Congress at a rally held in Gandhinagar, Mewani gave the event a miss.

The grand old party offered tickets to all the three youth leaders but Patel said he has no intention of contesting the polls. Sources say he is wary of siding with the Congress because it would provide the BJP with an opportunity to counter his influence on the politically significant community.

After the CCTV footage showing Patel’s presence at the hotel emerged, both the Patidar leader and Gujarat Congress in-charge Ashok Gehlot confirmed they met but said Gandhi was not present during their meeting.

Congress state president Bharatsinh Solanki told reporters that the meeting between Gandhi and Patel and Mewani was postponed and was likely to be held either on November 1, 2 or 3 when he will be back in Gujarat for Navsarjan Yatra.

Gehlot in a series of tweets also took a dig at the BJP government for the leak of CCTV camera clips.

“I met Hardik n Jignesh in Ummed Hotel. IB, Police are chckng hotel rooms. @PMOIndia @narendramodi ji Wat is happening in Gandhiji’s Gujarat? …The rooms which hv been booked in my name are being checked. We are openly saying, we have met them n will keep meeting them in future too (sic),” he said in another tweet.

While senior Patidar leaders and religious organisations have accepted the BJP’s initiative to form the Non Reserved Category Educational and Economic Development Board and Commission against their demand of an OBC status, Patel has maintained that the agitation for the status would continue.

Though Patidars are traditional supporters of the BJP, Patel’s rallies against the Gujarat government have so far received a good response from community members.

With Thakor, an OBC leader who was opposed to the Patidar agitation, joining the Congress, the community that either wants an OBC status or the quota system to be abolished, may go against Patel’s plan to join hands with the grand old party, if he has any.

ओपिनियन

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By Vipin Agnihotri With every passing day, Muslim youngsters are joining BJP. For them, the lure is a “slice of the development pie”. “There is...

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