बॉलीवुड

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फिल्‍म ‘शमिताभ’ से बॉलीवुड में इंट्री करने जा रही बॉलीवुड अभिनेत्री अक्षरा हासन को अपनी तुलना अपने माता-पिता (कमल हासन व सारिका) से किया जाना सही नहीं लगता. उनका कहना है कि मेरे माता-पिता को बहुत ज्‍यादा अनुभव है, उस मुकाम तक मेरा पहुंचना संभव नहीं हैं. अक्षरा इनदिनों अपनी आगामी फिल्‍म ‘शमिताभ’ के प्रमोशन में व्‍यस्‍त हैं.

आपको बता दें कि अक्षरा उसे समय बहुत छोटी थी जब उनके माता-पिता एकदूसरे से अलग हो गये थे. लेकिन अभिनेत्री का मानना है कि उस वाकिये ने उन्‍हें तोड़ने के बजाय और मजबूत किया. अक्षरा, कमल और सारिका की सबसे छोटी बेटी हैं. वर्ष 2002 में कमल-सारिका एकदूसरे से अलग हो गये थे और दो साल बाद दोनों को तलाक हो गया था.

अक्षरा ने बताया कि,’ जब मेरे माता-पिता एकदूसरे से अलग हुए तो इस बात ने मुझे ताकत दी. कुछ समय बाद इस बात का अहसास हुआ कि मैं कुछ नहीं कर सकती. ये उनकी जिदंगी है. वे जो करना चाहते हैं उसका फैसला मुझे उनपर ही छोड़ देना होगा. उनकी खुशी ज्‍यादा मायने रखती है.’

Akshara-Haasan-

आर बाल्‍की के निर्देशन में बनी इस फिल्‍म में अक्षरा के अलावा महानायक अमिताभ बच्‍चन और ‘रांझणा’ फेम धनुष भी मुख्‍य भूमिका में हैं. फिल्‍म में अक्षरा ने एक पत्रकार के रूप में नजर आयेंगी, जो अमिताभ और धनुष को एक करने की कोशिश करती है. अब वो दोनों को एक कर पाती है नहीं इसके लिए आपको फिल्‍म देखनी पड़ेगी.

अक्षरा ने आगे बताया कि,’ मैं ने अपने माता-पिता के करियर से बहुत कुछ सीखा है. जब भी मुझे कोई गुर सीखना होता है मैं दोनों (माता-पिता) से  बात करती हूं. श्रुति (बहन) से भी मुझे बेहद लगाव है.’ आपको बता दें कि श्रुति ने ‘शमिताभ’ के एक गाने में अपनी आवाज दी है. फिल्‍म 6 फरवरी को रिलीज होगी.

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इस फिल्म में बेशक शहर, किरदार और क्लाइमैक्स बेशक पूरी तरह से बदला हुआ नजर आए, लेकिन सच यही है कि डायरेक्टर मनीष गुप्ता की यह फिल्म नोएडा के बहुचर्चित आरुषि मर्डर केस पर आधारित है। अगर ऐसा ना होता तो इस फिल्म की रिलीज को रुकवाने के लिए तलवार फैमिली कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाती। बेशक, कहानी को अंजाम तक पहुंचाने के लिए फिल्म में सीबीआई इंस्पेक्टर बने सुनील पारस्कर ने इस हत्याकांड की कड़ियों को जिस अंदाज में जोड़ा है, उस पर आप यकीन ना करें, लेकिन इस क्लाइमैक्स को देखने के बाद दर्शकों को लगेगा कि हो ना हो, इस मर्डर मिस्ट्री का मास्टर माइंड कोई अपना हो सकता है। फिल्म शुरू होते ही पर्दे पर डिस्क्लेमर नजर आता है, जिसके मुताबिक फिल्म पूरी तरह से काल्पनिक है। दूसरी और फिल्म देखते हुए हॉल में बैठा हर दर्शक समझ जाता है फिल्म आरुषि हत्याकांड पर बेस्ड है।

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कहानी: आयशा महाजन (साक्षी सेम) मुंबई के एक नामी डॉक्टर दंपति की बेटी है। एक रात आयशा अपने बेडरूम में मृत पाई जाती है। मर्डर के बाद से डॉक्टर फैमिली का घरेलू नौकर गायब है। इस नौकर को डॉक्टर फैमिली ने कुछ अर्सा पहले ही अपने किसी जानने वाली की सिफारिश पर रखा था। मुंबई पुलिस जब इस हत्याकांड की जांच शुरू करती है तो जांच अधिकारी के शक की सुई आयशा के पिता डॉक्टर सचिन महाजन (आशीष विधार्थी) पर अटक जाती है। शक के आधार पर पुलिस डॉक्टर सचिन को अरेस्ट कर लेती है।

इस हत्याकांड की धीमी रफ्तार से चल रही पुलिस जांच की वजह से मामला सीबीआई को सौंपा जाता है। सीबीआई अफसर सुनील पारस्कर (केके मेनन) इस केस की नए सिरे से जांच शुरू करता है। लंबी तहकीकात के बाद पारस्कर इस केस की गुत्थी सुलझाता है तो हर कोई चौंक जाता है।

ऐक्टिंग: सीबीआई अफसर पारस्कर के किरदार में केके मेनन ने बेहतरीन काम किया है। डॉक्टर सचिन महाजन के रोल में आशीष विद्यार्थी ने अपनी दमदार ऐक्टिंग से खुद को एकबार फिर शानदार ऐक्टर साबित किया। आयशा की ममी के रोल में टिस्का चोपड़ा का जवाब नहीं। सचिन महाजन की प्रेमिका कम दोस्त बनीं मीता वशिष्ठ ने अपने किरदार को जीवंत किया है। डाक्टर सचिन के क्लिनिक में नर्स और घर की खास सदस्य बन चुकीं रेम्मी के किरदार में अश्विनी कलसेकर ने साबित किया कि वह रोल में फिट हैं।

निर्देशन: निर्देशक मनीष गुप्ता ने फिल्म की गति को कहीं कमजोर नहीं पड़ने दिया। क्लाइमैक्स का जवाब नहीं। इंटरवल से पहले और आखिरी 20 मिनट की फिल्म हर किसी को बांधकर रखने का दम रखती है।

क्यों देखें: अगर आप मर्डर मिस्ट्री पसंद करते हैं, तो यकीनन अपसेट नहीं होंगे। हां, फैमिली क्लास और मसाला फिल्मों के शौकीनों के लिए फिल्म में कुछ खास नहीं है।

कलाकार : केके मेनन, टिस्का चोपड़ा, आशीष विधार्थी, साक्षी सेम, अश्विनी कलसेकर, रमेश देव, मीता वशिष्ठ
निर्माता : वायाकॉम फिल्म्स
निर्देशक : मनीष गुप्ता
गीत :
अवधि : 121mins
मूवी टाइप : Thriller

 

 

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जयपुर
बॉलिवुड ऐक्टर सलमान खान को आपने इतने गुस्से में शायद ही कभी देखा होगा। राजस्थान के झुंझुनू में बाइकर्स की हरकतों से सलमान ऐसे आगबबूला हुए कि उन्हें सबक सिखाने के लिए वह अपनी मर्सेडीज रुकवाकर सड़क पर उतर आए। दरअसल बाइकर्स का यह ग्रुप लगातार उनकी कार के आसपास मंडरा रहा था और कुछ एक मौकों पर तो उनकी कार से टकराते-टकराते बचा था सलमान पिछले दिनों अपनी फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ की शूटिंग के लिए झुंझुनू में थे। सलमान शूटिंग के लिए झूंझुनू के एक इलाके से निकल रहे थे, तभी कुछ बाइकर्स उनके पीछे लग गए। सलमान की तस्वीर लेने और विडियो बनाने के चक्कर में वे सलमान की मर्सेडीज के आसपास मंडराने लगे। इस दौरान बाइकर्स कुछ अपशब्द भी कहते सुने गए।

 

इस दौरान एक बाइकर बिल्कुल उनकी कार के सामने आ गया था, जिससे हादसा होते-होते बचा। बाइकर्स की इस हरकत से सलमान गुस्से से लाल हो गए। उन्होंने बीच सड़क पर फौरन अपनी कार रुकवाई। सलमान दनदनाते हुए कार से उतरे और बाइकर्स की तरफ भागे।

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सैफ अली खान अपनी पत्नी और मां के साथ

 

आई आई एन डेस्क मुंबई –

जब करीना कपूर की अक्टूबर 2012 में सैफ अली खान से शादी हुई तब से ही वह कुछ खास धार्मिक संगठनों के निशाने पर रही हैं। करीना को ‘लव जिहाद’ मामले में पोस्टर गर्ल की तरह भी इस्तेमाल किया गया। ‘लव जिहाद’ विवादित टर्म धार्मिक कट्टरपंथियों ने मुस्लिम युवकों की हिन्दू महिलाओं से शादी के मामले में गढ़ा है। ‘लव जिहाद’ टर्म से निराश सैफ अली खान मानते हैं कि उनकी अभिनेत्री पत्नी को धार्मिक ग्रुप बेवजह टारगेट करते हैं।

सैफ ने कहा, ‘लोगों का मानना है कि करीना को मुस्लिम बना दिया गया है। नहीं करीना को मुस्लिम नहीं बनाया गया है।’ 44 साल के बॉलिवुड अभिनेता सैफ अली खान का मानना है कि ‘लव जिहाद’ की बात अफसोसजनक है। उन्होंने कहा कि ऐसी बातें भावनात्मक, बौद्धिक और सामाजिक स्तर पर कहीं भी किसी रूप में नहीं टिकती हैं। सैफ ने कहा कि उन्हें अपने आचरण, विवेक और बौद्धिकता की कसौटी पर रखकर इन मामलों में बोलना चाहिए।

सैफ ने कहा कि करीना को अन्य किसी चीज के मुकाबले उन्हें उनके काम के जरिए समझा जाना चाहिए। सैफ ने कहा, ‘देश को करीना के सिनेमा और समाज में योगदान पर गर्व होना चाहिए। वह महिला हकों और उनकी बेहतर सेहत के लिए काम करती हैं। करीना को भी मजबूती के प्रतीक और आधुनिक शख्सियत के तौर पर ग

ओपिनियन

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Four Professors of IIT-Kanpur got a reprieve from the Allahabad High Court on Wednesday when it stayed action against them in connection with harassment...

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