एजुकेशन

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नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने नालंदा विश्वविद्यालय चांसलर (कुलाधिपति) के तौर पर अपने दूसरे कार्यकाल के लिए यह कहते हुए अपना नाम वापस ले लिया है कि नरेंद्र मोदी सरकार नहीं चाहती कि वह पद पर बरकरार रहें।

लंबे समय से मोदी के आलोचक रहे सेन ने विश्वविद्यालय के गवनि’ग बोर्ड को लिखे पत्र में एक महीने पहले उनके नाम की सिफारिश किए जाने के बावजूद सरकार की ओर से उसका अनुमोदन नहीं किए जाने को विजिटर, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मंजूरी मिलने में विलंब का कारण बताया ।

पत्र में उन्होंने लिखा है, ‘ (सरकार की तरफ से) कार्रवाई नहीं करना बोर्ड के फैसले को पलटने के लिए समय नष्ट करने का एक तरीका है। ऐसे में जब सैद्धांतिक आधार पर सरकार के पास कार्रवाई करने और नहीं करने का अधिकार है..मेरे लिए यह निष्कर्ष निकालना कठिन नहीं है कि सरकार जुलाई के बाद नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के तौर पर मेरे कार्यकाल की समाप्ति चाहती है और तकनीकी तौर पर उसे ऐसा करने का अधिकार है।’ उन्होंने कहा कि यह अनिश्चितता और फैसला लेने में देरी नालंदा विश्वविद्यालय प्रशासन और इसकी अकादमिक प्रगति के लिए मददगार नहीं है।

उन्होंने लिखा है, ‘इसलिए मैंने फैसला किया है कि मुझे जुलाई के बाद भी इस पद पर बनाए रखने की सर्वसम्मत सिफारिश और गवर्निंग बोर्ड के अनुरोध के बावजूद नालंदा विश्वविद्यालय की बेहतरी के लिए अपने नाम को हटा लेना चाहिए।’ उन्होंने कहा, यह स्पष्ट है कि सरकार की मंजूरी के बिना मुखर्जी बोर्ड के सर्वसम्मत चयन पर अपनी संस्तुति देने की स्थिति में नहीं हैं ।

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आई आई एन डेस्क लखनऊ –
लखनऊ यूनिवर्सिटी और संबद्ध कॉलेजों के स्नातक छात्रों के वार्षिक परीक्षा फॉर्म छह जनवरी से भरे जाएंगे। एलयू प्रशासन ने पहली बार फॉर्म भरने की ऑनलाइन व्यवस्था की है। पहली बार परिसर के छात्रों को भी परीक्षा के फॉर्म भरने होंगे। कॉलेजों को लॉगिन आईडी और पासवर्ड भी जारी कर दिया गया है।
बीते वर्ष तकनीकी खामियों की वजह से फॉर्म भरने की ऑनलाइन व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी थी। इस बार प्रशासन ने पहले से तय की गई व्यवस्था को लागू करने का फैसला किया था। इसके तहत सभी संबद्ध 144 कॉलेजों और यूनिवर्सिटी परिसर के स्नातक छात्रों को ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरना होगा।
नया डोमेन बनवाया
यूनिवर्सिटी ने परीक्षा विभाग का नया डोमेन भी रजिस्टर कराया है। फॉर्म भरने के लिए कॉलेजों को इस पर रजिस्टर करना होगा। परीक्षा विभाग के लिंक www.lu-exam.in पर कॉलेज प्रशासन को छात्रों के ऑनलाइन डाटा कार्ड भरने होंगे।
जितनी सीटें उतने फॉर्म
परीक्षा नियंत्रक शैलेश कुमार शुक्ल ने बताया कि सभी कॉलेजों को कोर्स की सीट के हिसाब से ऑनलाइन फॉर्म जारी कर दिए जाएंगे। इससे सीट से अधिक दाखिले लेने वाले कॉलेजों पर लगाम भी लगेगी। ऑनलाइन सिस्टम खुद बखुद तय कोटा पूरा होने पर बंद हो जाएगा। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में 31 जनवरी तक ऑनलाइन फॉर्म भरे जाएंगे।
एलयू छात्रों के लिए अलग व्यवस्था
अधिकारियों का कहना है कि यूनिवर्सिटी छात्रों के लिए प्रशासन विशेष व्यवस्था कराएगा। इसके लिए परीक्षा नियंत्रक ने संकायाध्यक्षों के साथ बैठक कर नीति बनाने की बात कही है। छात्रों के लिए कंप्यूटर सेंटर या टैगोर लाइब्रेरी में व्यवस्था किए जाने की बात पर भी चर्चा की जा रही है।
छह जनवरी से कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के छात्रों के ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरे जाने की तिथि का प्रस्ताव दिया गया है। परिसर के छात्रों की सुविधा के लिए संकायाध्यक्षों और उच्चाधिकारियों से चर्चा की जाएगी।
– शैलेश कुमार शुक्ल, परीक्षा नियंत्रक

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आई आई एन डेस्क कोझिकोड-

कोझिकोड के एक सीबीएसई स्कूल में करीब 250 बच्चों को एक हाल में महज इसलिए घंटों तक बंद रखा गया क्योंकि उनकी फीस नहीं हो पाई थी इसमें बहुत से बच्चे ऐसे भी थे, जिनकी उम्र 8 साल थी। इतना ही नहीं, बच्चों को पानी तक नहीं पीने दिया गया।

समय पर स्कूल की फीस न जमा हो पाए तो सजा क्या हो सकती है? घंटों तक कमरे में बंद करके पानी तक पीने को मना कर दिया जाए? और, क्या इस गलती की सजा 8 साल के मासूम बच्चों को भी मिलनी चाहिए? अगर कोझिकोड के इस स्कूल में दी गई सजा को सही मान लिया जाए, तो जवाब ‘हां’ होगा।

इसका नतीजा यह हुआ कि दो बच्चे बेहोश हो गए और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। पुलिस ने स्कूल के प्रिंसिपल पी. अब्दुल रहमान, वाइस प्रिंसिपल गिरिजा सुंदरम और अकाउंट अफसर पर जूवेनाइल जस्टिस एक्ट और धारा 342 के तहत मामला दर्ज किया है।

सजा से बेहोश हुई 8 साल की इशम फातिमा ने बताया, ‘हॉल में बहुत गर्मी थी और हमें पानी तक नहीं दिया गया। बैठने की जगह भी नहीं थी।’ बच्चों के पैरेंट्स ने जानकारी दी कि स्कूल की मान्यता पिछले महीने ही खत्म हो गई थी, इसलिए फीस को लेकर संशय था।

हालांकि, स्कूल के डायरेक्टर टीएम अबूबाकर ने बताया कि जिनकी फीस नहीं जमा थी उन्हें हॉल में ब्रीफिंग के लिए बुलाया गया था। प्रिंसिपल वहां से निकल ही रहे थे कि स्कूल बंद होने का विरोध कर रहे कुछ बच्चों ने हॉल का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और प्रदर्शन करने लगे।

ओपिनियन